हां मैं हिंदू हूं
हां मैं हिंदू हूं:
वैसे तो भैंस के आगे बीन बजाने का कोई औचित्य नहीं है लेकिन हिन्दुत्व ही वो कारण है जिसकी वजह से हमारे भाई-बहनों को मारा जा रहा है, तो मैं ये बताना चाहती हूं कि हिन्दुत्व और सनातन को मिटाने का हसीन सपना वहीं देख सकता है जिसे इसका अर्थ नहीं ज्ञात है। सनातन धर्म अनादि और अनंत है। इसके अंत के लिए प्रयास आत्मघाती कदम है। क्योंकि यह शरीर के धर्म पर आधारित धर्म नहीं है अपितु आत्मा पर आधारित धर्म है। आत्मा का स्वरुप ब्रह्मांड व्यापी है। अतः आत्मा को समाप्त करने का प्रयास आत्मघाती नहीं तो और क्या है? क्या किसी के लिए यह संभव है कि वह ब्राह्मांड को समाप्त कर सके ? और तो और, हिन्दुत्व में शरीर भी ब्रह्मांड का एक प्रतिलिपि है। इस शरीर के तार पूरे ब्रह्मांड से जुड़े हुए हैं। शरीर का एक एक अणु पूरे ब्रह्मांड का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे में शरीर के नष्ट होने के बाद भी व्यक्ति का अस्तित्व बना रहता है। व्यक्ति का शरीर भी एक दो नहीं, तीन तीन होता है। स्थूल शरीर के अलावा सूक्ष्म और कारण शरीर भी होता है जिसका अस्तित्व मरने के बाद भी बना रहता है। सूक्ष्म एवं कारण शरीर का कोई भौतिक अस्तित्व नहीं होता। अतः उसका नाश संभव नहीं है। ऐसे में स्थूल शरीर को मारकर हिन्दुत्व को खत्म करने का हसीन सपना तो सपना ही बना रहेगा।
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