गर्व से कहो हम हिन्दू हैं
हां मैं हिंदू हूं
हिन्दू तन मन हिन्दू जीवन
रग रंग मेरा हिन्दू है।
तुमने हिन्दू को नहीं मारा है राक्षसों। हिन्दू मर ही नहीं सकता। क्योंकि हिन्दू एक शरीर नहीं होता। हिन्दू अपने अस्तित्व को पूरे ब्रह्मांड में व्याप्त मानता है। अतः हिन्दू को मारने के लिए तुम्हें पूरे ब्रह्मांड को खत्म करना पड़ेगा। तुम्हारे खतना से सीमित अल्लाह की हैसियत से हिन्दू बहुत ऊपर की चीज है। तुम्हारी सोच तो व्यक्ति के शरीर के भी निम्नतम स्तर तक सीमित है। तुम्हारे अल्ला वहीं तक व्याप्त हैं। एक हिंदू मृत्यु के बाद भी अपने अस्तित्व को मानता है। अतः हिन्दू कभी मरता नहीं। हिन्दू अपने ब्रह्मांडीय चेतना के साथ तदाकार होकर अपने अस्तित्व को उसमें विलीन कर लेता है। हिन्दू धर्म शास्त्रों में कहा गया है:
न हन्यते हन्यमाने शरीरे।
शरीर के नष्ट होने से आत्मा नष्ट नहीं होती। आत्मा अजर अमर अविनाशी है। आत्मा ब्रह्म का अभिन्न अंग है। अतः हिन्दू आत्मा को नष्ट करने के लिए तुम्हें ब्रह्मांड को नष्ट करना पड़ेगा, जो तुम्हारी ओछी सोच जो खतना तक सीमित है, के बस की बात नहीं है। हिन्दू, अहं ब्रह्मास्मि की अवधारणा पर आधारित है जो प्रत्येक हिन्दू को ब्रह्म ही मानता है। इसलिए तुम किसी व्यक्ति के शरीर को नष्ट कर सकते हो लेकिन हिन्दू को नष्ट करना तुम तो क्या तुम्हारे खतना तक सीमित अल्लाह के लिए भी एक हसीन सपने के सिखाये और कुछ नहीं। हाँ, इतना जरूर है कि राक्षसी धर्म के आका लोग तुमने एक को छेड़ कर अपनी कब्र खुद ही खोल ली है। बस अब तैयार रहो, कब्र में हमेशा के लिए गहरी नींद में सो जाने के लिए।
हिन्दुत्व जिंदा रहता है।
हिन्दुत्व मर नहीं सकता।
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